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बलिया के दोकटी थाना में एसआई समर सिंह की मिलीभगत से अनपढ़ विधवा महिला पर जबरजस्ती अंगूठा लगवाने का आरोप


पुलिस की छवि खराब करने वाली घटना, योगी सरकार के दावों पर सवाल

बलिया: यूपी की योगी सरकार लगातार पुलिस व्यवस्था को सुधारने और आम जनता का विश्वास जीतने का दावा करती रही है, लेकिन बलिया के दोकटी थाना में हुई एक घटना ने पुलिस की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना दोकटी के दलनछपरा गाँव में एक अनपढ़ विधवा महिला मीना देवी के साथ हुए दुर्व्यवहार और जबरजस्ती अंगूठा लगवाने की घटना ने पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस मामले में थाना दोकटी के एसआई समर सिंह पर दबंगों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।  


 घटना का विवरण  

मामला बैरिया तहसील के दलनछपरा गाँव का है, जहाँ विधवा महिला मीना देवी अपने नवनिर्मित घर में खिड़की और जंगला लगाना चाहती थी। उनके घर के पीछे डेढ़ फीट जमीन उनकी और डेढ़ फीट जमीन सरकारी अध्यापक महावीर यादव की है। महावीर यादव ने पहले ही अपने घर में खिड़की और जंगला लगा लिया था, लेकिन जब मीना देवी ने ऐसा करने का प्रयास किया, तो उन्हें रोक दिया गया।  


इस मामले में महावीर यादव ने थाना दोकटी के एसआई समर सिंह से शिकायत की। एसआई समर सिंह ने मीना देवी को धमकाते हुए कहा कि अगर वह महावीर यादव की बात नहीं मानेंगी, तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इसके बाद, रविवार सुबह दस बजे थाना पर समझौता होने की बात कही गई, लेकिन इसके बजाय गाँव के दबंगों ने मीना देवी को सोनू सिंह के घर बुलाकर एक पहले से तैयार समझौता पत्र पर जबरजस्ती अंगूठा लगवा लिया।  


 महिला पर दबाव और धमकी  

मीना देवी और उनकी बहन ने बताया कि उन्हें पत्र में क्या लिखा है, यह नहीं बताया गया और न ही उन्हें इसकी कोई कॉपी दी गई। दबंगों ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि अगर वे अंगूठा नहीं लगाएंगी, तो एसआई समर सिंह उन्हें जेल भेज देंगे। मीना देवी की बहन ने आरोप लगाया कि एसआई समर सिंह ने उन्हें जूते से मारने और मुँह फोड़ने की धमकी भी दी।  


पुलिस की भूमिका पर सवाल  

इस पूरे मामले में एसआई समर सिंह की भूमिका संदेह के घेरे में है। थाना प्रभारी हरिशंकर सिंह ने बताया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं थी और न ही किसी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। सवाल यह है कि अगर समझौता थाना पर होना था, तो इसे सोनू सिंह के घर पर क्यों करवाया गया? इसके अलावा, एसआई समर सिंह ने थाना प्रभारी को इस मामले में अंधेरे में क्यों रखा?  


यह घटना न केवल पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार को भी उजागर करती है। एक अनपढ़ विधवा महिला को धमकाकर और डराकर जबरजस्ती समझौता करवाना मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन है। योगी सरकार ने महिला सुरक्षा और पुलिस सुधार के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं उनके दावों को खोखला साबित करती हैं।  


इस मामले की तुरंत जाँच होनी चाहिए और एसआई समर सिंह सहित सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, मीना देवी को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन को तुरंत कदम उठाने चाहिए। यह घटना पुलिस और प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि अगर ऐसी घटनाएं रुकती नहीं हैं, तो आम जनता का विश्वास पुलिस और सरकार से उठ सकता है।  




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