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बलिया हत्याकांड: चाचा-भतीजे की अर्थी उठी, मचा कोहराम से गूंज उठा गांव

बलिया हत्याकांड: चाचा-भतीजे की अर्थी उठी, मचा कोहराम से गूंज उठा गांव


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बलिया-प्रदेश न्यूज 24: करुण क्रंदन और चीत्कार के बीच इंसान ही नहीं, बेजुबान भी सिसक रहे थे। हर आंख नम थी, हर चेहरा गमगीन था। चारों ओर मातमी सन्नाटा पसरा था। जब एक साथ चाचा-भतीजे की अर्थी उठी, तो ऐसा लगा मानो प्रकृति भी विलाप कर रही हो। गलियां सूनी हो गईं, सड़कें जाम हो गईं। रोते-बिलखते परिजन पुलिस से बस एक ही सवाल कर रहे थे—अब इन्हें कौन जिंदा करेगा? मासूम बच्चे पुलिस अधिकारियों के पैरों पर गिरकर गिड़गिड़ा रहे थे। यह हृदय विदारक दृश्य था सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के खरीद गांव का।

गाँव मे मचा कोहराम

शुक्रवार की शाम जब पोस्टमार्टम के बाद चाचा-भतीजे के शव घर पहुंचे, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। हर ओर चीत्कार गूंज उठी। हर आंख अंतिम दर्शन को बेताब थी। बुधवार की देर शाम गांव में एक पक्ष ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस होकर दूसरे पक्ष के घर पर हमला कर दिया था। इस हमले में मां-बेटे सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनमें चाचा अनिल यादव और भतीजे पंकज यादव की मौत हो गई थी। वहीं, मोती चंद यादव और पंकज की मां गीता देवी घायल हो गई थीं।


शुक्रवार की शाम जब भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एंबुलेंस से अनिल और पंकज का शव गांव पहुंचा, तो माहौल और गमगीन हो गया। पंकज की घायल मां गीता देवी बेटे के शव से लिपटकर बिलख रही थीं, जबकि अनिल की पत्नी चंद्रकला पति के शव को देखकर दहाड़े मारकर रो रही थीं। भाई और बेटे का शव देखकर अक्षय लाल यादव फूट-फूटकर रोने लगे। पंकज की बहनें वंदना और रंजना, छोटे भाई पीयूष और प्रवीण, अनिल की पुत्री संजना और पुत्र शुभम समेत पूरे परिवार की चीख-पुकार सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें छलक पड़ीं। जो जहां था, वहीं सिसक रहा था।

देर शाम जब एक साथ दो अर्थियां उठीं, तो हजारों लोगों की भीड़ कंधा देने के लिए उमड़ पड़ी। सरयू घाट पर जब पंकज की चिता को उनके पिता अक्षय लाल यादव और अनिल की चिता को उनके पुत्र शुभम ने अग्नि दी, तो माहौल और भी गमगीन हो गया।


पुलिस छावनी में तब्दील हुआ पूरा गांव

घटना के बाद उपजे तनाव को देखते हुए पूरे गांव को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। शुक्रवार को शवों के गांव पहुंचने की सूचना पर हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिसे नियंत्रित करने के लिए आठ से अधिक थानों की पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी। गांव के हर कोने पर पुलिस बल तैनात था। यह सुरक्षा घेरा गांव से लेकर सरयू घाट तक बना रहा। एएसपी अनिल कुमार झा समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।


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