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नयी सुबह का वादा : कुमार रमेश

 नयी सुबह का वादा



अंधेरों की चादर हटेगी यकीनन,
उजाले की किरणें चमकती मिलेंगी।
जो बीत गया वो सपना समझ लो,
नयी राहों पे उम्मीदें खिलेंगी।

चलो फिर से इक दीप जलाएँ,
अंधेरों से लड़ने की ठानी है हमने।
हर मुश्किल को पीछे छोड़ आएँ,
नयी सुबह की कहानी है हमने।

पथरीली डगर से डरना नहीं है,
हवा तेज़ हो तो झुकना नहीं है।
गगन भी झुकेगा हमारे कदम पर,
बस ख़ुद से कभी रुकना नहीं है।

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं,
उड़ानों के सपने जिए जाएँगे।
जो अब तक न पाया उसे पा सकेंगे,
नए हौसलों से आगे बढ़ेंगे।

लेखक: कुमार रमेश

( B.A द्वितीय वर्ष इलाहाबाद यूनिवर्सिटी )

🔥 "कल की धूप का इंतज़ार मत करो,
आज ही अपना सूरज बनो!" 🔥


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